ਸਾਹਿਤ

लेखक आनंद जैन की कलम से कविता “हम लड़के”…

The poem "Hum Boys" from the pen of author Anand Jain...

जो बचपन में स्कूल के बाद खेलने निकल जाते हैं,
और जवानी में कॉलेज के बाहर नुक्कड़ पर भीड़ लगाते हैं।
लड़के, जो दोस्तों के घरों में सबसे बेगैरत समझे जाते हैं,
उनके माँ बाप के सामने मासूमियत बड़ी दिखाते है।

लड़के, जो बहनों की शादी में दिन रात भूल जाते है,
और विदाई के वक़्त खम्बे के पीछे छुप जाते हैं।
लड़के, जो सिगरेट पीकर पापा के सामने नही आते है,
और उनके सामने बाइक की स्पीड धीमी करके चलाते हैं।

लड़के, जो अपनी मोहब्बत को दोस्तों से भाभी बुलवाते है,
और दिल टूटने पर शराब को अपना सहारा बनाते है।
लड़के, जो गालियों के बिना कभी बात नही करते है,
पर माँ की खातिर कुछ करने से ना घबराते है।

लड़के जो कविताओं, कहानियों को डायरी पर लिखते हैं,
पर शर्म के मारे उसको अलमारी में कपड़ों के पीछे रखते है।
लड़के, जो अपने संस्कारों को जिन्दा रखने की कोशिश करते हैं,
किसी ट्रेन, बस में मजबूर की मदद भी करते हैं।

लड़के, जो दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए खुद ख्वाइशों को मार लेते है,
हाँ, लड़के जो बहुत जल्द जिम्मेदारियों को सम्भाल लेते है।

लेखक: आनंद जैन

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